आंटी का प्यार

20 Jan

आज मैं आपको एक सच्ची और अनोखी कहानी सुनाता हूँ। मैं जब स्कूल में पढ़ता था तो मेरे पड़ोस में एक युगल रहने आया, उन्हें हम सभी भाई-बहन अंकल-आंटी कहते थे। आंटी की उम्र करीब 28 साल थी, उनका फिगर 36-24-42 था। अकसर उनकी ब्रा का पीछे का हुक खुला रहता था। यही वह बात थी जिससे मेरा मन सेक्स की ओर गया।

उस समय मेरी उम्र 18 साल की थी। आंटी, जिनका नाम सरला था, अकसर मुझे किसी न किसी काम से बुलाती रहती थी, कभी कोई क्रीम लाने, कभी चाय की पत्ती लाने के लिए कहती। मैं भी उनके वक्ष का दीदार करने के लालच में उनका काम कर देता था। वो कई बार मेरे से बचे पैसे नहीं लेती थी। मेरा भी काम चल जाता था।

अंकल के दफ़्तर का चपड़ासी जिसका नाम मुरली था, अकसर घरेलू काम जैसे कपड़े प्रेस करने, बागवानी करने आता था। जब अंकल बाहर टूर पर जाते तब मुरली की बीबी लीला जिसकी उम्र 24 साल की थी, उनके यहाँ रात को सोती थी। बाकी समय भी कई बार लीला घर आती थी।

एक दिन मैं आंटी को कुछ सामान देने उनके घर गया, मैंने दरवाज़ा खटखटाया लेकिन दरवाज़ा खुला ही था, मैं अन्दर चला गया। उनके बेडरूम से लड़ने की आवाज़ आ रही थी। फ़िर कुछ देर बाद मारपीट की आवाज़ आई, थोड़ी देर में आंटी बाहर आई, वो बहुत गुस्से में थी, मुझे देख कर सामान्य होने की कोशिश की, फिर बोली- अरे, तुम कब आये ?

मैंने कहा- आँटी, मम्मी ने किसी रेसीपी की कटिंग भेजी है, जो अपने माँगी थी।

उसके बाद वह बोली- ठीक है, मेज़ पर रख दो !

फिर पैर पटकते हुए बाहर निकल गई। फिर मै अंदर गया तो देखा सुरेश अंकल अन्दर रो रहे थे।

मैंने पूछा तो कुछ छुपाते हुए बोले- कुछ नहीं ! पैर फिसल गया था, इसलिए पैर में मोच आ गई है और दर्द हो रहा है, इसीलिए आँखों में आँसू आ गए।

बाद में मुरली से मालूम हुआ क़ि साहब की नौकरी मेमसाब के पापा ने लगवाई है, साहब थोड़े गरीब घर के हैं इसलिए कभी-कभी ऐसी घटना हो जाती है।कुछ दिन बाद सरला आंटी ने मुझे घर बुलाया, घर में कोई नहीं था, आंटी ने मुझे बाम लाने को कहा, मैंने कहा- आंटी, आज बुधवार है, सभी दुकानें बंद रहती हैं।

आंटी ने कहा- ठीक है, कल ले आना !

मेरा दिमाग ख़राब हुआ, मैंने सोच लिया आर नहीं तो पार !

आज जो भी हो चाहे मेरी मम्मी को बताये या नहीं आज तो मैदान मारना है।

मैंने कहा- आंटी, क्या सर में दर्द है?

आंटी- हाँ !

मैंने कहा- आंटी, मैं थोड़ा एक्युप्रेशर जानता हूँ, यदि आप कहें तो मैं कोशिश करूँ?

आंटी- ठीक है !

फिर मैंऩे उनके माथे और गालों पर उंगली घुमाना शुरू किया, गाल को धीरे-धीरे सहलाने लगा, मेरा 7″ लम्बा औज़ार खड़ा हो गया लेकिन आंटी को कोई फर्क नहीं पड़ा।

मैंने उस दिन जब सुरेश अंकल रो रहे थे, का जिक्र किया, आंटी चौंक गई।

मैंने उंगली गले में सरकाया, फ़िर आंटी ऩे गहरी साँस लिया, उनके दोनों स्तन अन्दर-बाहर होने लगे।

आंटी ऩे कहा- कुछ नहीं ! वैसे ही थोड़ी कहा-सुनी हो गई थी।

मैंने कहा- अंकल तो कह रहे थे कि पैर फिसल गया था?

फिर मैंने अपने हाथ गर्दन के निचले हिस्से में घुमाना शुरू किया, आंटी की साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया।

आंटी हंसने लगी, बोली- पैर नहीं फिसला था ! मैंने खुराक दी थी !

फिर मेरे हाथ आंटी के गले से मुँह के गाल, फिर माथे, फिर वापस गले के निचले हिस्से पर ऊपर-नीचे होने लगे !

मैंने बड़े भोलेपन से कहा- क्या खुराक दी थी?

आंटी- साला मेरी बिल्ली ! मुझी को म्याऊँ? साले का लण्ड खड़ा ठीक से नहीं होता और मुझ को कहता है “एक महीने ससुराल में रहो !”फिर क्या आप ससुराल जाओगी? मैंने मासूमियत से कहा।

आंटी- साले की ऐसी पिटाई की कि अब जिन्दगी में कभी मेरे को ससुराल जाने को नहीं बोलेगा !

मैंने कहा- आप अंकल की पिटाई करती हैं?आंटी ऩे कहा – हाँ !

अब आंटी भी मज़ा लेने लगी, उसने मेरा हाथ पकड़ कर गले से ऊपरी छाती पर लगाया। फिर मेरे हाथ को अपने ब्लाउज के बटन पर ले गई। मैंने तुरंत उनका बटन खोलना शुरू किया, फिर उनकी पीठ पर उंगली से सहलाने लगा और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर ब्रा के हुक पर रख दिया। मैं ब्रा खोलने के बाद पागलों की तरह उनके स्तन दबाने लगा।

आंटी हंसने लगी, बोली- ऐसे नहीं बेटा ! थोड़ा धीरे !फिर उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह अपने चुचूक पर लगाया, मुझे सारा जहाँ मिल गया !

आंटी ऩे मुझे अपने कपड़े खोलने को कहा, मैं तुरंत नंगा हो गया, फिर आंटी के कपड़े उतारे, पहली बार किसी जवान औरत को नंगा देखा।

मेरी आँखें फटी रह गई। आंटी ने मेरा 7″ लम्बा औज़ार देखा तो उसकी आँखें फटी रह गई।

तभी सुरेश अंकल अन्दर आ गये !

चूंकि अभी-अभी उनका इतिहास सुना था, इसीलिए मुझे कोई डर नहीं लगा।

सुरेश अंकल- सरला, यह क्या कर रहे हो ?

सरला आंटी- देख मादरचोद ! इससे कहते हैं “लंड” तेरा तो लुल्ली है !

फिर अंकल के बाल पकड़ कर उनका मुँह अपनी चूत में घुसा दिया।

अंकल- सरला प्लीज़ !

आंटी- साले आज ये तेरे को चोदना सिखाएगा ! जल्दी कपड़े उतार कर मेरी चूत चाट !

मैं उसके स्तन चूसने लगा, फिर जब अंकल थक गए तो मैं अपना लण्ड आंटी की चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

अंकल अब आंटी के स्तन पीने लगे।

आंटी चीत्कार उठी- उह्ह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह उईईई माआ आअ चोद ! चोद ! देख सुरेश ! तू कब चोदना सीखेगा ?

15 मिनट बाद मैं झड़ गया, आंटी भी संतुष्ट हो गई। फिर थोड़ी देर बाद जब हम लोग कपड़े पहनने लगे तब आंटी ऩे मुझे रोका और फ़िर दूसरा चक्र शुरू हो गया।

अब आंटी घोड़ी बन गई, मैंने उनकी चूत में अपना लण्ड डाला !

अंकल नीचे से उसके स्तन चूसने लगे।

आंटी- आऽऽऽऽ हऽ ऽऽऽ मारऽऽऽ डाऽऽऽला ऽऽऽ आआआ !!!!!!

फिर आंटी ऩे सबको कपड़े पहनने को कहा।

इस तरह अंकल, आंटी और मेरी चुदाई कार्यक्रम करीब दो साल चला। फिर उनका तबादला दूसरे शहर में हो गया।

साली बनी घरवाली

20 Jan

दोस्तो, मेरा नाम राज है और में पंजाब से हूँ।

मैंने अन्तर्वासना पर बहुत कहानिया पढ़ी हैं, उनमें से कुछ सच्ची होती हैं और कुछ में मसाला भी डाला होता है। पढ़ते-पढ़ते मैंने भी सोचा कि मैं भी अपना एक मात्र किस्सा लिख दूं !

दरअसल बात उस समय की है जब मेरी उम्र सिर्फ बाईस वर्ष रही होगी, मेरी शादी हुई को अभी आठ महीने ही हुए थे कि ससुराल वालों ने मेरी साली की शादी तय कर दी। मैंने जिंदगी में पहली बार अपनी पत्नी से ही सेक्स किया था और कभी किसी दूसरी लड़की के साथ मेरे सम्बन्ध नहीं रहे थे, मैंने कभी कोशिश भी नहीं की थी।

मेरे ससुराल में मेरी एक सगी साली थी और तीन चाचा-ताया की लड़कियाँ थी। ताया की लड़की नाम रेनू और उम्र लगभग उन्नीस वर्ष, देखने में बहुत ही सेक्सी और प्यारी लगती है। वैसे देखने में तो मेरी बीवी भी कम नहीं पर बीवी और साली में फर्क यह है कि साली का वक्ष और कूल्हे कुछ ज्यादा ही सेक्सी हैं।

उस दिन हम शाम करीब तीन बजे ससुराल में पहुँचे। पहुँचते ही हमारा स्वागत मेरी सगी साली ने किया, वो दरवाजे पर ही मिल गई थी। उसके बाद हम घर के बाकी लोंगों से मिले और फिर सब धीरे धीरे अपने अपने काम में लग गए। ताया की लड़की रेनू पाँच बजे हमारे पास आई, आकर अपनी बहन को गले मिली, जबकि मुझे नमस्ते करके बैठ गई।

तो मैंने पूछा- क्या मुझे गले नहीं मिलोगी?

तो उसने मजाक में कहा,”आप से गले मिलने से कहीं आपको कर्रेंट न लग जाये !”

मैंने कहा,”कितनी वोल्ट है ?”

तो बोली,”यह तो मिलने से ही पता चलेगा !”

मैंने अपनी बीवी की तरफ देखा और उसे कहा,”तुम बताओ कि कहाँ मिलना है?”

मेरी बीवी ने और मैंने इसे मजाक ही समझा था लेकिन रेनू दे अन्दर कुछ और चल रहा था। उस वक्त बात आई-गई हो गई। फिर वो भी अपने अपने काम में लग गई। मैं अपने साले के साथ बाज़ार में चला गया और हम रात आठ बजे के करीब आये। विवाह के कारण किसी साली से जयादा बात नहीं हो पाई और ऐसे ही रात के दस बज गए।

रात दस बजे तक रेनू घर में रही और ऐसे ही घर में काम करती रही। मुझे अपने घर में जल्दी सोने की आदत है सो मैं दस बजे सो गया। हमारा बिस्तर अलग लगाया गया था, तो मैं अकेले ही सोने चला गया, मैंने सोचा मेरी बीवी बाद में आ जाएगी।

जब मेरी बीवी आई तो मैंने समय देखा, रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे, मेरी बीवी ने दरवाजा लगा दिया, चिटकनी नहीं लगाई थी। हम बेड पर सोने चले गए। दोनों ने प्यारर से एक दूसरे को चूमा और थकावट होने के कारण बातें करते करते हमें पता ही नहीं चला कब नींद आ गई।

सोते सोते मुझे अचानक दरवाजा खुलने की आवाज आई तो मैंने देखा मेरी बीवी बेड पर नहीं थी और रेनू मेरे कमरे में आ रही थी। मैंने समय देखा तो रात का डेढ़ बज रहा था।

मैंने रेनू से पूछा,”किरण (मेरी बीवी) कहाँ है?”

तो उसने बताया,”वो तो बारह बजे ही लड़कियों के साथ मेहँदी लगाने चली गई थी, मैं भी वहाँ थी, सब लड़कियाँ वहाँ ही सो जाएँगी।”

तो मैंने पूछा,”रेनू, तुम यहाँ क्यों आ गई?”

तो बोली,”मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा जीजाजी के पास चलते हैं !”

सच मानो उसे देख कर मेरा भी मन मचलने लगा था और मेरी सारी नींद उड़ चुकी थी। मैंने रेनू से पूछा,”बाहर कौन-कौन जग रहा है?”

तो उसने कहा,”मैं सब देख कर आई हूँ, बाहर इस घर में कोई भी जाग नहीं रहा है।”

बात करते करते ही उसने धीरे से दरवाजे की कुण्डी लगा दी।

मैंने कहा,”अगर तुम्हरी बहन आ गई और उसने ऐसे देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी।”

रेनू पहले से ही गर्म थी, पता नहीं कब से मन में यही सोच रही होगी। रेनू की आँखों में देखने से पता चल रहा था कि वो बहुत गर्म है और चुदाई के पागल हो रही है।

मैंने उसको पकड़ा और बाँहों में लेकर चूमा वो तो मुझ से चिपक ही गई थी।

मैंने उसे मजाक में पूछा,”रेनू, तुझ में तो बहुत करंट है?”

रेनू तो जैसे समय देखकर आई थी और चुदाई के लिए पागल हो रही थी, बोली,”राज मैं तुम से बहुत देर से इस प्यास को मिटाने के लिए तरस रही थी, आज मौका मिला है, मैं इसे खोना नहीं चाहती !”

और मुझसे और जोर से लिपट गई।

मैंने मौके का फायदा उठाना शुरू किया, उसे जोर से जफ्फी में लिया। पाँच-छः मिनट ऐसे ही रहने के बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया। उसे भी मज़ा आ रहा था, उसने भी सहलाना शुरू किया और धीरे धीरे उसका हाथ मेरे पजामे की तरफ चला गया।

मेरा लंड भी अपने पूरे जोश में था, मैंने उसका कुरता ऊपर उठाया और उसने भी कुरता निकालने में देर नहीं लगाई, मैंने साथ ही उसकी ब्रा की हुक भी खोल दी, उसके गोरे मम्मे बड़े रसीले थे, मैंने धीरे-धीरे उसको चाटना शुरू किया, उसके चुचूक को दबाया, उसके मुँह से धीरे-धीरे आवाजें आनी शुरू हो गई थी।

इसी बीच उसने मेरे पजामे में हाथ डाल दिया और मेरा पजामा नीचे कर दिया। पांच मिनट चूसने के बाद मैंने उसकी चूत को ऊपर से ही सहलाना शुरू किया, उसकी चूत तो पहले ही काफी गीली हो रही थी, मैंने उसका नाड़ा खोल दिया, उसकी सलवार को नीचे सरका दिया।

रेनू बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी, नड़ा खुलते ही बोली,”राज अब देर मत करो ! मुझे और मत तरसाओ।”

मैंने उसकी गोरी टांगों को चूमना शुरू किया। फिर मैंने उसकी टांगों को ऊपर उठाया और उसकी टाँगों के बीच में अपने घुटनों के बल बैठ गया। इससे मेरा लंड उसकी चूत के बिल्कुल नज़दीक आ गया था। मैंने लंड का टोपा उसकी चूत के ऊपर लगाया और हल्का सा धक्का लगाया। चूत पूरी गीली थी और आधा लंड अंदर चला गया।

इस तरह मैंने पहले कभी अपनी बीवी से सेक्स नहीं किया था, मुझे इसमें दिक्कत आने लगी। मैंने उसकी एक टांग नीचे करके एक टांग अपने कंधे पर रख ली। इस तरह लंड अच्छी तरह अंदर चला जाता है, मैंने फिर उसकी चूत में लंड डालने की क्रिया शुरू की। पूरा लंड अंदर जाते ही उसने मुझे जोर से भींच दिया। मुझे पता चल गया कि रेनू ज्यादा देर तक रह नहीं पायेगी, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसका पूरा मुँह बंद कर दिया और जोर से धक्का लगाया। जोर से धक्का लगाने से मुझे महसूस हुआ कि रेनू को कुछ दर्द हुआ है सो मैंने अपना लंड दबा कर रख कर कुछ देर तक उसको सहलाने की क्रिया शुरू की।

रेनू ने कहा,”राज, मेरी प्यास बुझा दो !”

मैंने काम शुरू कर दिया और जोर से धक्का लगाना शरू कर दिया, रेनू ने भी नीचे से अपने कूल्हे हिला-हिला कर साथ देना शुरू कर दिया था।

रेनू दो मिनट में ही चरम पर पहुँच गई और ठंडी पड़ गई। मैंने कुछ देर रुकने के बाद उसको घोड़ी की अवस्था में किया और पीछे से उसकी चूत को चोदना शुरू किया। दो मिनट में मेरा भी पानी निकल गया।

मैंने उसको लिटा दिया।

हम दोनों कुछ देर इसी दशा में रहे, फिर मैंने पूछा- रेनू कैसा लगा जीजा का करंट?

उसने मुस्कुरा कर मुझे चूम लिया और कहा- जीजाजी, आप बहुत शरारती हो ! अब मैं आपकी साली नहीं रही !

मैंने कहा- रेनू, मैंने कभी तुम्हारे बारे में ऐसे नहीं सोचा था। लेकिन साली का ख्याल रखना भी तो जीजा का फ़र्ज़ होता है, अब जब तक तुम्हारी शादी नहीं होती, तुम जब चाहो अपनी प्यास मिटा लेना, लेकिन अपनी दीदी का ख्याल रखना !

जीजा-साली का यह सिलसिला डेढ़ साल तक चला, हम कई बार मिले और मैंने साली को पूरी घरवाली बना डाला। अब वो भी अपनी शादी के बाद अपने घर में खुश है और मैं भी खुश हूँ। रेनू की शादी के बाद हम दोनों ने कभी वैसा नहीं किया, अब हम दोनों जीजा-साली की तरह ही मिलते हैं और सब ठीक-ठाक है।

दोस्तों यह असली कहानी कैसे लगी?

मेरे दोस्त की बीवी

18 Jan

हाय,मैं एक ३० साल का आदमी हूं और दिल्ली मैं रहता हूं, मेरा एक दोस्त है जो कि रामपुर मैं रहता है और उसके भाई भाभी हलद्वानी मैं रहते हैं। वो पहले उसके ही साथ रहते थे पर अब कुछ चार साल से अलग रह रहे हैं।

ये कहानी करीब साढ़े चार साल पहले शुरु हुई थी मैं साल मैं एक या दो बार अपने दोस्त से मिलने उसके घर जाता था, सफ़र को पास करने के लिये मैं अक्सर नोवेल या सेक्स स्टोरी बुक्स ले लेता था। अपने दोस्त के पस्स जाने के बाद मैं अपना बेग ऐसे ही रख देता था पर एक दिन जब मैने अपना बेग खोला तो मुझे अपनी सेक्स स्टोरी बुक नहीं दिखाई दी।

तब मैने अपने दोस्त से पूछा तो उसने मना कर दिया कि उसने नहीं ली है तभी थोड़ी देर बाद उसकी भाभी जिसका नाम लवर(नाम बदला हुआ) था वो बोली कि तुम क्या ढूंढ रहो हो तब मैने कहा कि मेरे एक किताब नहीं मिल रही है तब उसने कहा की कहीं तुम इस किताब को तो नहीं ढूंढ रहे हो तो मैं उसके हाथ मैं किताब देख कर चौंक गया तब उसने कहा कि मैं तो अकसर ही तुम्हारे बेग से किताब निकाल कर पढ़ती हूं पर इस बार तुम्हे पता चल गया। इस तरह से उससे मेरा खुला हंसी मजाक (सेक्सी भी ) शुरु हो गया। फिर कुछ दिनो बाद मेरे दोस्त के भाई और भाभी हलद्वानी चले गये।

फिर जब मैं करीब छह महीने के बाद अपने दोस्त के यहां गया तो दोस्त से मिलने के बाद मैं हलद्वानी चला गया अपनी लवर से मिलने। वहां जा कर देखा तो मेरे दोस्त का भाई टूर पर गया हुआ था पर लवर मुझे देख कर बहुत ही खुश हुई।

अब मैं समझ गया कि आज बहुत कुछ हो सकता है। पहले तो हम आपस मैं हंसी मजाक करते रहे फिर रात का खाना खाने के बाद उसने मेरा बिस्तर गेस्ट रूम मैं लगा दिया और खुद अपने बच्चे को लेकर अपने बेडरूम मैं चली गयी।

थोड़ी देर बाद वो मेरे रूम मैं दूध लेकर आयी तब मैं उसे देखता ही रह गया क्योंकि उस वक्त उसने हालांकि सलवार सूट पहन रखा था पर वो उस वक्त क्या लग रही थी मैं बयां नहीं कर सकता। उसने मुझे एक नोटी स्माइल के साथ दूध दिया तो मैने मजाक मैं कहा कि मुझे तो दो चूची वाली गाय का दूध पीना है। तब उसने हंस कर कहा कि पहले तुम इस तो पी लो फिर देखा जायेगा।

तब मैने मन में सोचा कि आज तो मैं तुझे चोद कर ही रहुंगा। फिर दूध पीने के बाद वो मेरे पास आ कर बैठ गयी और मुझसे मजाक करने लगी तब मैने कहा कि अब मुझे दो चूची वाली गाय का दूध पीना है तब उसने कहा कि मैने कब मना किया है पर तुम्ही देर रहे हो।

सोरी दोस्तों, अभी मेरे बोस ओफ़िस में आ रहे हैं इस लिये मैं अपनी कहानी अधूरी छोड़ रहा हूं शेष जल्दी ही।

मेरी बीवी की पहली चुदाई !

18 Jan

अभी हमारी सुहागरात का पहला सप्ताह ही था, मेरी बीवी नीना मुझसे पूरी तरह खुल जाना चाहती थी ताकि वह् पूरी जिंदगी भरपूर चुदाई का मज़ा लेती रहे। संयोग से मैंने यह सवाल भी छेड़ दिया। लेकिन वह बड़ी मासूमियत के साथ बताने लगी अपनी पहली चुदाई की कहानी।

तब वह दसवीं कक्षा की छात्रा थी, 18 साल की कमसिन कुड़ी। भाभी और भैया के साथ वह पावर-प्लांट की कालोनी में रहती थी। वह पढ़ने अच्छी थी, सो भाभी चाहती थी कि नीना को बढ़िया नंबर मिलें। बाकी विष्यों में तो ठीक थी वह, मगर अंग्रेजी की टयूशन की जरूरत थी। लिहाजा भाभी ने पड़ोस में रहने वाले विनोद से उसके पढ़ने की बात कर ली।

पहले दिन भाभी नीना को लेकर विनोद के घर गईं। विनोद की शादी नहीं हुई थी। वह अकेला ही रहता था। उस दिन तो नीना और विनोद से परिचय होता रहा और इधर उधर की बातें हुईं। हालाँकि भाभी थोड़ी देर में वापस आ गई।

विनोद हरियाणा का जाट छोरा था। मस्त अंदाज का, उम्र होगी कोई 22 साल। बैंक में नौकरी करता था। बातचीत के बीच में विनोद रह रहकर नीना के उभारों को निहार लेता और नीना सहम जाती।

अगले दिन नीना फिर पहुँच गई टयूशन के लिए। आज शायद विनोद पहले से ही चुदाई का मन बना कर तैयार बैठा था। पहले उसने नीना से वर्ड-मीनिंग रटने को कहा और खुद कोई पत्रिका पढ़ने लगा। आधा घंटा बीता होगा क़ि विनोद ने नीना से वर्ड मीनिंग सुनाने को कहा।

भला कहीं आधे घंटे में कैसे याद होता?

नकली गुस्सा दिखाते हुए विनोद ने उसके गाल पर थप्पड़ बढ़ाया क़ि नीना ने अपना चेहरा पीछे खींच लिया और विनोद का जोरदार हाथ नीना की चूचियों से जा टकराया।

विनोद अफ़सोस जताने लगा- ओह ! तुम्हें चोट लगी ! यह तो बेशकीमती खजाना है। आखिर तुम्हारा पति क्या सोचेगा? कहीं इस पर दाग ना पड़ जाये ! तुम अपने बच्चों को दुधू कैसे पिलाओगी?

नीना शर्म से लाल हुई जा रही थी। उधर विनोद अपनी हांके जा रहा था। लगे हाथ नीना की सहलाने के बहाने से वह चूचियाँ सहलाने लगा।

तब तक नीना भी मस्ती में आने लगी थी। नीना ने उस समय स्कर्ट और टॉप पहन रखा था।

भाई ! यह मत पूछना कि आगे क्या हुआ? वैसे समझ लो कि जो हर चुदाई में होता है, वही नीना की चुदाई में भी हुआ- चूमा चाटी, कपड़े उतारना फिर चूची चूसना, चूत चाट कर मस्त कर देना और फिर लंड-चूत का खेल।

यही ना ?

हालाँकि नीना ने मुझे इतना ही बताया कि विनोद को नीना के गर्भवती होने का डर सताता रहता था। इसलिए उसने कभी खुल कर चूत की जड़ तक कभी लण्ड नहीं डाला। हमेशा ऊपर ही ऊपर पेलता था।

मगर भाई ! तुम ही बताओ कि ऐसा कभी संभव है?

क्या 18 साल की लौंडिया चोदने को मिले और कोई छोड़ देगा, भरपूर चुदाई किये बिना ही?

नहीं ना ?

फिर नीना की चूत को अगले तीन साल तक विनोद अगरबत्ती दिखाता रहा?

हाँ, नीना ने ईमानदारी के साथ एक बात जरूर बताई क़ि विनोद का लण्ड देखकर वह डर गई थी। नीना के मुताबिक कम ही लोगों का लंड इतना तगड़ा होता है। नहीं भी तो नौ इंच लम्बा तो था ही उसका लण्ड !

आखिर वह जो जाट छोरा था। आज शादी के इतने साल बाद भी नीना कहती है क़ि अगर किसी को चुदाई का असली मज़ा लेना हो तो किसी जाट का लंड खाना चाहिए।

पाठको, आप को यह मेरी चुदैल बीवी की सच्ची कहानी कैसी लगी? जब आपकी प्रतिक्रिया मिलेगी तभी मैं नीना की चूत के और किस्से लिखूँगा।

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